गन्ना भुगतान को लेकर अमरोहा में किसानों का धरना, ब्याज समेत बकाया भुगतान की मांग
वीएम सिंह की अगुवाई में किसानों ने उठाई आवाज, 14 दिन के बाद हुए विलंबित भुगतान पर ब्याज देने की मांग


गन्ना किसानों के खाते में पैसा पहुंचने के बावजूद ब्याज का हिसाब बाकी है या फिर अभी भुगतान ही अधूरा है? अमरोहा में इसी सवाल को लेकर किसानों का आंदोलन जारी है। किसान नेता वीएम सिंह ने बकाया भुगतान के साथ ब्याज दिलाने की मांग उठाई है।
उत्तर प्रदेश के अमरोहा। गन्ना भुगतान और विलंबित भुगतान पर ब्याज की मांग को लेकर अमरोहा में किसानों का आंदोलन जारी है। किसान नेता सरदार वीएम सिंह की अगुवाई में किसान बकाया गन्ना भुगतान का पूरा हिसाब और देरी की अवधि का ब्याज दिलाने की मांग कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि गन्ना खरीद के बाद भुगतान निर्धारित समय में होना चाहिए। गन्ना नियंत्रण आदेश, 1966 के तहत गन्ने की डिलीवरी के 14 दिन के भीतर भुगतान नहीं होने पर देरी की अवधि के लिए 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का प्रावधान है।
किसान नेता वीएम सिंह का कहना है कि किसानों को उनके गन्ने का भुगतान तो मिलना ही चाहिए, साथ ही जिस अवधि के लिए भुगतान में देरी हुई है, उस अवधि का ब्याज भी किसानों को दिया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि किसानों को उनके बकाये और ब्याज का स्पष्ट एवं वर्षवार हिसाब उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
अमरोहा में चल रहे आंदोलन में किसानों की मांग है कि उनके गन्ना भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड को स्पष्ट किया जाए और यह बताया जाए कि किस किसान का भुगतान कब हुआ और कितनी अवधि तक भुगतान लंबित रहा। किसानों का कहना है कि ब्याज की गणना भी इसी आधार पर पारदर्शी तरीके से की जानी चाहिए।
वीएम सिंह का कहना है कि यह लड़ाई केवल अमरोहा के किसानों तक सीमित नहीं है। लखीमपुर खीरी समेत प्रदेश के दूसरे इलाकों में भी विलंबित गन्ना भुगतान पर ब्याज का मुद्दा किसानों द्वारा उठाया जा रहा है।
वीएम सिंह ने सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अदालत के सामने किसानों के भुगतान से जुड़े आंकड़े और जमीन पर किसानों की स्थिति में अंतर दिखाई देता है। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है कि अधिकारियों के स्तर से सरकार तक किसानों की वास्तविक स्थिति की पूरी जानकारी नहीं पहुंच रही हो।
गन्ना भुगतान से जुड़े ब्याज के मामले में न्यायिक प्रक्रिया भी चल रही है। किसानों की ओर से अदालत में यह मुद्दा उठाया गया है कि विलंबित भुगतान पर कानून के मुताबिक ब्याज किसानों को मिले। इसी मांग को लेकर किसान संगठन अलग-अलग जिलों में धरना और पंचायत कर रहा है।
किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यदि गन्ने का भुगतान समय पर नहीं मिलता तो किसान को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। किसानों की मांग है कि बकाया गन्ना भुगतान का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए, विलंबित भुगतान की अवधि निर्धारित की जाए और नियमानुसार ब्याज की रकम किसानों के खातों में पहुंचाई जाए।
अब किसानों की नजर प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर है। आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि जब तक उन्हें भुगतान और ब्याज से जुड़े अपने बकाये का स्पष्ट हिसाब नहीं मिलता, तब तक वे अपनी मांग को लेकर आवाज उठाते रहेंगे।



